श्रीमद्भगवद्गीता भारतीय अध्यात्म का अमूल्य ग्रंथ है, जो मानव जीवन के लिए शाश्वत मार्गदर्शन प्रदान करता है। गीता प्रेस, गोरखपुर द्वारा प्रकाशित यह संस्करण मूल संस्कृत श्लोक, आदि शंकराचार्य की प्रामाणिक व्याख्या तथा सरल हिन्दी अनुवाद सहित प्रस्तुत किया गया है।
महाभारत के कुरुक्षेत्र युद्धभूमि में भगवान श्रीकृष्ण और अर्जुन के संवाद के रूप में यह ग्रंथ कर्मयोग, भक्तियोग, ज्ञानयोग और अनुशासन के महत्व को स्पष्ट करता है। यह हमें जीवन के संघर्षों में स्थिर रहने, धर्मानुसार कर्म करने तथा मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग दिखाता है।
✨ मुख्य विशेषताएँ:
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संस्कृत मूल पाठ सहित आदि शंकराचार्य की प्रामाणिक टीका
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सरल एवं सहज हिन्दी अनुवाद
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कर्म, भक्ति और ज्ञानयोग पर गहन मार्गदर्शन
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नित्य पाठ एवं चिंतन के लिए उपयुक्त
यह ग्रंथ प्रत्येक साधक और पाठक के लिए जीवन को सही दिशा देने वाला प्रकाशस्तंभ है।




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